सौरव गांगुली बीसीसीआई के नए अध्यक्ष और अमित शाह के बेटे जय शाह सचिव

मैच फिक्सिंग विवाद के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) को पहली बार कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष मिलेगा और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित प्रशासकों की समिति (सीओए) का काम खत्म हो जाएगा लेकिन इसके साथ ही सवाल यह भी है कि 10 महीने बाद क्या होगा। पूर्व भारतीय कप्तान और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (कैब) के अध्यक्ष सौरव गांगुली 23 अक्टूबर को बीसीसीआइ की एजीएम में दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड के मुखिया का पद संभालगें। इसके साथ ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के पुत्र और गुजरात क्रिकेट संघ के पूर्व संयुक्त सचिव जय शाह बीसीसीआइ के सचिव बनेंगे।

बीसीसीआइ अध्यक्ष के तौर पर गांगुली का कार्यकाल कुल 10 महीने का होगा क्योंकि वह इससे पहले पांच साल दो महीने तक कैब के संयुक्त सचिव व अध्यक्ष पद पर विराजमान रह चुके हैं। वहीं जय शाह भी इससे पहले गुजरात क्रिकेट संघ के संयुक्त सचिव रह चुके हैं और वह लगभग एक साल तक ही बोर्ड के सचिव पद पर रह सकते हैं। यानी कुछ महीनों बाद फिर इन दोनों पदों के लिए चुनाव होंगे या कोई बड़ा खेल होगा। लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार कोई व्यक्ति बीसीसीआइ या राज्य क्रिकेट संघ या दोनों में मिलाकर लगातार छह साल तक ही पदाधिकारी रह सकता है।

बोर्ड के एक दिग्गज ने कहा कि इसका खाका तैयार कर लिया गया है और समय आने पर उसका रहस्योद्घाटन भी किया जाएगा। फिलहाल इन दोनों को जो मौका मिला है उसे इन्हें भुनाना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित प्रशासकों की समिति (सीओए) से बड़ी लकीर खींचनी चाहिए। अधिकारी ने कहा कि जानबूझकर ही इन दोनों को इन पदों पर सुशोभित किया गया है। इससे एक तीर से कई निशाने लगाए गए हैं।

कुल मिलाकर हमारा उद्देश्य था कि बीसीसीआइ को सीओए से मुक्त किया जाए और वह हो गया। अब आगे की रूपरेखा बीसीसीआइ के दिग्गज मिलकर रख लेंगे। जब बोर्ड के दिग्गज से पूछा गया कि क्या आठ महीने बाद गांगुली पश्चिम बंगाल में भाजपा के चेहरे होंगे तो उन्होंने कहा कि यह तो भाजपा ही बेहतर बता सकती है लेकिन आने वाले समय में कुछ भी संभव है। गांगुली को ऐसे ही नहीं बोर्ड के अध्यक्ष का पद दिया गया है। 10 महीने बाद क्या होगा इसकी तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। उन सब चीजों को देखकर यह फैसला किया गया है।

गांगुली ने कहा- जब कप्तान था तब टीम में भी खराब हालात थे

गांगुली ने कहा, ‘मुझे रविवार रात 10:30 तक नहीं पता था कि मैं अध्यक्ष बनने वाला हूं और जय शाह के साथ काम करुंगा। मुझे लगता है कि जब मैं कप्तान था तब भी ऐसे ही हालात थे। टीम में काफी उलझे हालात थे। तब भी मैंने चीजें संभाली थीं।’ 10 महीने के कार्यकाल के बारे में उन्होंने कहा, ‘अगर अध्यक्ष पद के लिए कुछ नियम हैं तो हैं। मेरा बंगाल में अनुभव काफी ज्यादा है। इस पद के चुनाव में अनुभव काफी बड़ी चीज रही। जय शाह का भी एक्सपीरियंस काफी ज्यादा है। मेरे संपर्क में कोई भी राजनेता नहीं था। यही सच्चाई है। ममता दीदी का शुक्रिया उन्होंने मुझे बधाई दी।’

गांगुली 2015 से क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के अध्यक्ष थे

47 साल के गांगुली 2015 से क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के अध्यक्ष थे। सोमवार को बोर्ड की बैठक में उनके नाम पर सहमति से पहले कई सदस्यों ने आपत्ति जताई। इस फैसले को लेकर बोर्ड के सदस्य दो गुट बंटे थे। इनमें एक अनुराग ठाकुर और दूसरा एन श्रीनिवासन का गुट था। श्रीनिवासन गुट बृजेश को अध्यक्ष बनाना चाह रहा था, लेकिन अंत में अनुराग गुट के उम्मीदवार के नाम पर ही सहमति बनी।

बीसीसीआई की नेटवर्थ करीब 12 हजार करोड़ रुपए

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गांगुली करीब 12 हजार करोड़ रुपए नेटवर्थ वाली बीसीसीआई की बागडोर संभालेंगे। 2017-18 में बोर्ड का नेटवर्थ 11916.8 करोड़ रुपए था। इससे पहले 2016-17 में 8431.9 करोड़, 2015-16 में 7847.1 करोड़ और 2014-15 में 5438.7 करोड़ रुपए बोर्ड की कमाई थी। बीसीसीआई ने 2008 से 2018 तक तकरीबन 3500 करोड़ रुपए टैक्स के तौर पर जमा किए, जो कि सलाना 350 करोड़ रुपए है।

गांगुली ने कहा- मेरे लिए कुछ अच्छा करने का मौका

गांगुली ने कहा, ‘‘ये मेरे लिए कुछ अच्छा करने का शानदार मौका है। मैं ऐसे समय में इस कुर्सी पर बैठ रहा हूं, जब बोर्ड की छवि लगातार खराब हो रही है। मैं देश के लिए खेला और कप्तानी की। मेरे लिए कुछ कर दिखाने का मौका है। छोटे कार्यकाल में मेरी पहली प्राथमिकता प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों की देखभाल करना होगा। भारतीय क्रिकेट में सभी हितधारकों से मिलने की योजना है। मैं कुछ ऐसा करना चाहता हूं जो सीओए ने 33 महीनों तक नहीं किया।’’

Avinash Roy

Chief in Editor at Samastipur Town Web Portal

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