मन्नत हुई पूरी तो खोईंछा पर नटुआ नचाकर रौना माई का जताया आभार

समस्तीपुर :- लोक आस्था के महापर्व छठ को मन्नतों का पर्व कहा जाता है। हम भले ही 21वीं सदी में पहुंच गए हों और आधुनिकता हम पर हावी हो चुकी है, लेकिन आज भी कई परंपराएं अपनी जगह कायम हैं। मन्नत पूरी होने पर रौना माई को अर्घ्य के साथ-साथ खोईंछा पर नटुआ (स्त्री की पोशाक में पुरुष नर्तक) नचाने की परंपरा भी सदियों से मिथिलांचल में चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि रौना माई से मांगी गई मन्नत पूरी होने पर खोईंछा पर नटुआ नचाने से रौना माई खुश होती हैं।

सदियों से चली आ रही इस परंपरा को आज भी लोग निभा रहे हैं। वर्तमान आधुनिक दौर में लोग इसे भले ही चंद पलों के मनोरंजन के रुप में देखते हों, पर जब बात आस्था की होती है तो इस रिवाज को निभाने में छोटे-बड़े का भेद मिट जाता है। आज भी शहर हो या गांव, महापर्व छठ के दौरान घाटों पर नटुआ का नाच देखने को मिलता आ रहा है और इस माध्यम से श्रद्धालु रौना माई के प्रति अपनी आस्था और भक्ति का परिचय देते हुए मनोकामना पूरी होने का धन्यवाद देते हैं।

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मन्नतों के प्रतीक होते हैं अर्घ्य :

छठ पर्व में अस्ताचल और उदयमान सूर्य को अर्घ्य के समय घाटों पर जितने भी अर्घ्य होते हैं वे किसी न किसी मन्नत या मनोकामना का प्रतीक ही होते हैं। सदियों से हिन्दु समाज में विशेषकर बिहार प्रांत में यह मान्यता चली आई है कि सच्ची आस्था और विश्वास से मांगी गई मन्नत रौना माई जरुर पूरी करते हैं। शायद इसीलिए इस पर्व को आस्था का महापर्व भी कहा जाता है। मन्नत पूरी होने पर अपने आराध्य को अपनी आस्था और भक्ति प्रदर्शित करने का यह माध्यम भी अनूठा है।

छह सालों तक नटुआ नचवाने का है रिवाज :

परंपरा है कि जिसकी भी मन्नत पूरी हो जाती है वह पांच साल तक लगातार दोनों अर्घ्य के समय घाट पर नटुआ का नाच करवाते हैं। पांच साल पूरे होने पर एक साल अतिरिक्त इस रिवाज को निभाया जाता है। लोगों का मानना है कि छह साल तक नटुआ नहीं नचवाने से रन्ना माई नाराज हो जाती हैं।

रौना माई सब का करतीं कल्याण :

गांव-देहात में ही नहीं, यह परंपरा शहर में भी लोग निभा रहे हैं। सत्यनारायण साह बताते हैं कि उनकी शादी के कई साल बाद उन्हें एक बेटा हुआ। बेटा जब दो साल का था तो ऐसा बीमार पड़ा कि बचने की कोई उम्मीद नहीं थी। रौना माई से मन्नत मांगी तो बेटा भला चंगा हो गया। पूरे छह साल तक पत्नी ने खोईंछा पर नटुआ का नाच कराया। अब बेटा जवान हो गया है। महाराजगंज निवासी गोपाल झा ने भी कहा कि मन्नत पुरी होने पर लगातार छह सालों तक घाट पर नटुआ का नाच कराया जिससे रन्ना माई खुश हुई और सभी विपदाएं समाप्त हो गई।

Avinash Roy

Editor-in-Chief at Samastipur Town Web Portal