“मैं गाँधी मैदान हूँ…” [कविता – नौशाद की कलम से]

मैं गाँधी मैदान हूँ

बिहार की शान हूँ

बदलाव का प्रतीक हूँ

रैलियों का गवाह हूँ

हाँ, मैं गाँधी मैदान हूँ ।

 

मैं गाँधी मैदान हूँ

शहर की अजान हूँ

युवाओं का मान हूँ

नेताओं की पहचान हूँ

नए नेता उपजाता मैं हूँ

हाँ, मैं गाँधी मैदान हूँ।

 

मैं गाँधी मैदान हूँ

इतिहास का गवाह हूँ

पूरे बिहार की आवाज हूँ

बेसहारा का सहारा मैं हूँ

बेरोजगारों का रोजगार हूँ

हाँ, मैं गाँधी मैदान हूँ ।

 

मैं गाँधी मैदान हूँ

तख्तो, ताज भी बदला हूँ

कर्पूरी से आरक्षण दिलाया हूँ

लालू से परिवर्तन लाया हूँ

नीतीश से सम्मान बढ़ाया हूँ

हाँ, मैं गांधी मैदान हूँ।

 

मैं गांधी मैदान हूँ

लोहिया, नारायण को जगाया हूँ

मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति भी बनाया हूँ

राजेंद्र प्रसाद की याद दिलाता हूँ

गाँधी का स्मारक बनाया हूँ ।

हाँ, मैं गांधी मैदान हूं ।।

मैं — गाँधी मैदान हूँ … ।।।

 

नौशाद वारसी की कलम से... 🖋️

Avinash Roy

Editor-in-Chief at Samastipur Town Web Portal

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