Exclusive : कचरे से होगा करोड़ों लोगों की कमाई का जुगाड़, जानें कैसे…

देश में अब स्वच्छता के साथ संपन्नता की भी बात होगी। केंद्र सरकार ने यही थीम रखी है स्वच्छ भारत मिशन के अगले चरण की। इस चरण में कचरे के कारोबार से करोड़ों लोगों की कमाई की जुगाड़ पर फोकस होगा। कचरा बीनने वालों से लेकर उसे छांटने और प्रोसेसिंग करने के काम से यह रोजगार पैदा होंगे। फेज-2 को अप्रैल से लागू करने की तैयारी है। इसका मिशन पीरियड 2020 से 2025 होगा।

केंद्र ने राज्यों को इसका प्रस्ताव भेजा है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए राज्यों से इस पर एक दौर की बात भी हो चुकी है। मिशन के फेज-2 में सेनीटेशन के अलावा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और गंदे पानी के पुन: प्रयोग पर फोकस होगा।

केंद्र सरकार ने दो अक्टूबर 2014 में स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी। लक्ष्य रखा गया था खुले में शौच मुक्त भारत। सरकार का दावा है कि उसने बहुत हद तक इस लक्ष्य को पा लिया है। बाकी बचे काम को भी इस साल 31 मार्च तक पूरा करा लिया जाएगा।

वहीं स्वच्छता को जनांदोलन बनाने, लोगों को इसकी आदत डालने और इससे रोजगार भी पैदा करने के लिए अब इसका दूसरा चरण शुरू करने की भी तैयारी कर ली गई है।

इसमें खुले में शौच मुक्ति से आगे बढ़कर अब शौचालयों के शानदार रखरखाव की बात हो रही है। स्लज और सेप्टेज के प्रबंधन पर जोर रहेगा। वहीं कचरा मुक्त शहर (गार्बेज फ्री सिटी) के प्रोटोकॉल के तहत निकायों को कम से कम तीन स्टार रेटिंग तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

अब सिर्फ डोर टू डोर कचरा कलेक्शन से काम नहीं चलेगा। कचरे को अलग किए जाने के साथ ही उसकी प्रोसेसिंग को अनिवार्य कराया जाएगा। इसके लिए कूड़ा एकत्रित करने को सेकेंडरी स्टेशन स्थापित करने के साथ ही प्रसंस्करण यूनिट लगाने होंगे। इनके जरिए देश में करीब 42 करोड़ लोगों को रोजगार देने की भी बात होगी।

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ताकि नदियों में न जाए गंदा पानी

दूसरे फेज में गंदे पानी के पुन: प्रयोग पर खास ध्यान रहेगा। किसी भी हाल में गंदे पानी को नदियों में जाने से रोका जाएगा। इसके लिए तालाब बनाने सहित कई अन्य उपाय सुझाए गए हैं। गंदे पानी को शोधित कर उसे कृषि सहित अन्य कार्यों में प्रयोग किया जाए।

बदलेगा फंडिंग पैटर्न

केंद्र सरकार दूसरे चरण में स्वच्छ भारत मिशन के तहत की जाने वाली फंडिंग का पैटर्न भी बदलने जा रही है। अब केंद्र की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत होगी जबकि बाकी 40 प्रतिशत राज्य सरकारों और निकायों के हिस्से आएगा।

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पहले फेज में केंद्र की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत, राज्य की 23 प्रतिशत और निकाय की करीब 42 प्रतिशत थी। खास बात यह है कि अब निकायों के दावों पर यूं ही पैसा नहीं मिलेगा। हर काम का परफारमेंस ऑडिट स्वतंत्र एजेंसी द्वारा कराया जाएगा। तभी आगे की राशि जारी की जाएगी।

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Avinash Roy

Editor-in-Chief at Samastipur Town Web Portal

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