9 महीने के दौरान 18 वर्ष से कम उम्र की 3591 लड़कियां बनीं मां, सबसे ज्यादा 400 बिथान में

समस्तीपुर:- खुशहाल परिवार का मंत्र ‘लड़कियों की हो उम्र 18 व लड़काें का 21 हो तो करें हाथ पीला’। यह स्लोगन अस्पताल की दीवारों के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर लिखा हुआ मिल जाएगा। बावजूद 9 महीने के दौरान समस्तीपुर जिले में 18 वर्ष से कम उम्र की 3591 लड़कियां (किशोरी) मां बनी हैं।

यह आंकड़ा सिर्फ सरकारी अस्पतालों का है। सबसे अधिक 400 किशोरियों के मां बनने का मामला बिथान प्रखंड से सामने आया है। दूसरे स्थान पर सिंघिया प्रखंड है। यहां 345 युवतियों ने बच्चों को जन्म दिया है। कम उम्र की लड़कियों के मां बनने के पीछे ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी शादी की उम्र को लेकर जागरूकता अभाव है।

सिविल सर्जन डॉ. सियाराम मिश्रा बताते हैं कि 18 से कम उम्र की लड़कियों के मां बनने से जच्चा व बच्चा दोनों के लिए खतरा बना रहता है। इस उम्र की महिलाएं अक्सर कुपोषण की शिकार हो जाती हैं। बच्चे भी कम वजन के हाेते हैं। इससे उसके जीवन पर खतरा बना रहता है।

शिक्षा की कमी से कम उम्र में हो रही शादी

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो प्रचार-प्रसार व जागरूकता कार्यक्रम के बावजूद अब भी सुदूर देहाती इलाके में कम उम्र में लोग लड़कियों की शादी कर रहे हैं। कम उम्र में शादी होने पर बहुत जल्द वह बच्चे को जन्म दे रही है। 14-15 वर्ष होते ही जिम्मेदारी निपटाने के लिए लड़कियों की शादी कर देते हैं।

बीते पांच वर्षों में 20 किशोरियों की शादी का मामला बाल कल्याण समिति के पास पहुंचा था। दर्जन भर से अधिक को नोटिस भेजा गया था। कम उम्र में शादी न हो इसके प्रति लोगों में शिक्षा व जागरूकता जरूरी है।

तेजपाल सिंह, पूर्व अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति

लड़कियों के मां बनने की सही उम्र 21 वर्ष के बाद है। 21 से पूर्व मां बनने पर महिलाओं में खून की कमी, कम वजन के बच्चों का जन्म के अलावा सामान्य प्रसव की संभावना कम होती है। एेसी महिलाओं का प्राय: ऑपरेशन करना पड़ता है।

डॉ. मंजुला, स्त्री रोग विशेषज्ञ

Input Danik Bhaskar

Avinash Roy

Chief in Editor at Samastipur Town Web Portal

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *