आनंद मार्ग चारित्रिक विकास की पाठशाला

समस्तीपुर। मानव इतिहास में हमने देखा है कि नारियों ने केवल नारीत्व को ही गौरवान्वित नहीं किया है बल्कि समस्त मानव जाति को गौरवान्वित किया है। महिला शिक्षित होने के उपरांत ही समाज निर्माण की भूमिका का निर्वहन कर सकेंगी। जबकि मनुष्य शिक्षित होने के बाद भी नैतिक वाहन मनुष्य नहीं बन पा रहे है। आनंद मार्ग नैतिकवान बनाते हुए चारित्रिक विकास कराता है। नारी पुरुष की जननी है, जहां नारियों को सम्मान, मर्यादा व आर्थिक सुरक्षा मिली है वहीं समाज और वीर पुरुषों को जन्म दिया है। उक्त बातें गुरुवार को प्रेस वार्ता के दौरान आनंद मार्ग प्रचारक संघ महिला कल्याण विभाग दिल्ली सेक्टर की सचिव अवधुतिका आनंद चितप्रभा आचार्या ने कही। उन्होंने कहा कि नारियों में अहिल्या, कुंती, द्रौपदी इत्यादि समाज की भागीदारी बनी। उसी तरह समाज में आज की नारियों में भी आगे आने की लालसा है, पर आज देश के अंदर चारों तरफ नारी को अपमानित एवं कलंकित किया जा रहा है। नारी उत्पीड़न और प्रताड़ना का अध्याय आज भी जारी है। अत्याचार का शिकार होकर वह आज भी मानसिक रोगों से ग्रसित है। महिलाओं के सर्वांगीण विकास हेतु त्रिदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इसमें बच्चों में अच्छे संस्कार, अच्छी शिक्षा एवं नैतिकवान बनाने के सभी पहलुओं पर प्रशिक्षित किया जाएगा। मौके पर अवधुतिका आनंद अदिति आचार्या, डॉ. शांति सुमन, मृदुला ¨सह, सरस्वती कुमारी, रुबी वर्मा, मधु कुमारी, संगीता कुमारी, भावना ¨सह, पुष्पा कुमारी, अनुकृति आनंद आदि उपस्थित रही।

1965 में हुई थी महिला कल्याण विभाग की स्थापना

नारियों की शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक, सामाजिक, आर्थिक, शिक्षा संस्कृति आदि विभिन्न समस्याओं के समाधान एवं सर्वांगीण विकास के लिए समाज में उन्हें गरिमापूर्ण उन्नत शिखर में प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से युग मनीषी, दार्शनिक तथा महान आध्यात्मिक विभूति आनंदमूर्तिजी ने 23 मई 1965 में आनंद मार्ग महिला कल्याण विभाग की स्थापना की। विश्व कल्याण के लिए उनके द्वारा आध्यात्म, धर्म, राजनीति, अर्थ नीति, विज्ञान, साहित्य, कला, संगीत, शिक्षा, सभ्यता, संस्कृति आदि सर्व समर्पित किया गया है।

Avinash Roy

Editor-in-Chief at Samastipur Town Web Portal

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