नगर पर्षद को परवाह नहीं, कड़ाके की ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त

फोटो:- अविनाश राय
फोटो:- अविनाश राय

मौसम में अचानक आये बदलाव और सर्द हवाओं ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है़ फुटपाथों पर जीवनयापन वाले गरीबों, निराश्रितों पर यह ठंड भारी पड़ रही है़ एक-एक पल गुजारना मुश्किल हो रहा है, लेकिन नगर परिषद को इसकी परवाह नहीं है़ सरकार के स्पष्ट निर्देश के बावजूद नगर परिषद द्वारा ना तो फुटपाथों पर रात गुजारने वाले रिक्शा-ठेला चालकों, निराश्रितों के लिए कंबल की व्यवस्था है और ना ही शहर में कही अलाव की ही व्यवस्था की गयी है़ जान बचाने के लिए ठंड से लड़ने का इंतजाम गरीबों, निराश्रितों को खुद करना पड़ रहा है़ यही वजह है कि रास्ते में जहां-तहां लोग कागज, गत्ता, पत्ता, पॉलीथिन, दवाओं व अन्य सामान के खाली डिब्बे, पुआल, अनुपयोगी जूता-चप्पल, टायर, ट्यूब तक जलाकर शरीर को गरमी पहुंचाते दिख रहे हैं.

नगर परिषद की तरह स्वयं सेवी संस्थाओं को भी इनकी परवाह नहीं है़ कुछ लोगों को अपवाद स्वरूप छोड़ दिया जाये, तो किसी के भी कदम ठंड से जूझ रहे इन गरीबों को गरम कपड़े देने के लिए नहीं बढ़ सके हैं.
कोहरे ने राहगीरों का रोका रास्ता : सर्दी बढ़ने से शहरवासियों की परेशानी भी बढ़ रही है़ एक ओर पहाड़ों से होकर मैदानी क्षेत्र को ठंडा करने वाली हवाएं उनके लिए मुसीबत बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर कोहरा राहगीरों का रास्ता रोक रहा है़ तीन दिन से रात में कोहरा गहराने से राहगीरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है़
रविवार को कोहरे की चादर ओढ़कर दिन निकला़ मौसम विभाग के अनुसार सुबह के समय विजिवलिटी शून्य रही, जबकि दोपहर 11 बजे विजिवलिटी आठ सौ मीटर पहुंच गयी. इस बार पहाड़ों पर बर्फबारी समय से पहले होने के कारण दिसंबर महीने का पहला व दूसरा हफ्ता ठंडा रहा है़ पिछले कुछ दिनों से लगातार मौसम की मिजाज बदलने के कारण पारा लुढ़कता जा रहा है व कनकनी बढ़ती जा रही है़
सरकारी तौर पर अलाव एवं कंबल की व्यवस्था नहीं किये जाने से ठंड से बचने का उपाये लोग अपने-अपाने ढंग से करते हुए सरकार को कोसते नहीं थक रहे हैं. ठंड के कारण काटे गये धान की दौनी और कुटाई में मुश्किल पेश आ रही है़ इधर, कोहरे की वजह से आलू और सरसों के अलावा सब्जियों की फसल मारे जाने की आशंका है़ गेहूं की बुआई में भी देर हो रही है़ इधर, ठंड के कारण शहर की दुकानें भी देर से खुलीं. ठंड के कारण अस्पताल में मरीजों का बुरा हाल है.
कूड़ा जला कर शरीर को पहुंचा रहे गरमी
कर्पूरी बसपड़ाव स्थित जर्जर रैन बसेरा.
रैन बसेरा में समुचित व्यवस्था नहीं
दिन में लगातार सामान्य से कम तापमान के चलते गलन बढ़ रही है़ इस महीने तीन बार सबसे ठंडे दिन का रिकार्ड टूट चुका है़ बावजूद शहरी क्षेत्र में रिक्शा चालकों, दैनिक मजदूरों, असहायों, आवास विहीनों एवं ऐसे गरीब नि:सहाय व्यक्तियों के रहने के लिए बने रैन बसेरा में समुचित व्यवस्था अबतक नहीं की गयी है़ नगर परिषद क्षेत्र में सिर्फ कर्पूरी बस पड़ाव में ही छह व मगरदही रोड में एक रैन बसेरा है, लेकिन समुचित व्यवस्था के नाम पर यहां सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है़ बता दें कि आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने जहां रैन बसेरा उपलब्ध नहीं है, वहां आवश्यकता अनुसार अस्थायी शरणस्थली बनाने का निर्देश दिया था़ साथ ही रैन बसेरा एवं अस्थायी शरणस्थलों पर पर्याप्त संख्या में कंबल रखने का भी आदेश दिया था.

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