साल 2019 में लगने वाले हैं पांच ग्रहण, 3 सूर्य ग्रहण और 2 चंद्र, क्लिक कर जानिये तारीखें

नववर्ष 2019 में हम सब एक साथ कई खगौलीय घटनाओं के गवाह बनेंगे। सालभर में कुल पांच ग्रहण लगेंगे। इसमें तीन सूर्य और दो चंद्रग्रहण हैं। हिन्दू धर्मावलंबियों में ग्रहणों का खास महत्व है। इसको लेकर कई तरह की धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हैं। ग्रहण के समय गंगा स्नान, दान आदि की परंपरा है। इन ग्रहणों से प्रदेश, देश व आमजन भी प्रभावित होंगे। जनवरी में ही दो ग्रहण लगेंगेज्योतिषाचार्य प्रियेंदू प्रियदर्शी ने पंचांगों के हवाले से बताया कि लगभग चौदह वर्षों के बाद वर्ष में पांच ग्रहण लग रहे…

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इस गांव में किसी की शादी होने पर पूरा गांव जमाता है दही, मिटटी के बर्तनों में पहुंचाते हैं घर

यह उत्तर प्रदेश के बलिया जिला स्थित नरहीं गांव है। किसी के भी घर शादी हो, वह पूरे गांव में एक-एक मिट्टी का पात्र बांट आता है। पात्र पर नाम व विवाह तिथि अंकित होती है। अब सभी ग्रामवासी उस पात्र में दही जमाते हैं और विवाह संध्या पर पूरे गांव से सैकड़ों पात्रों में भरा दही संबंधित व्यक्ति के यहां पहुंच जाता है। लाख दुश्मनी हो, लेकिन दही पहुंचाना कोई नहीं भूलता, वह भी नि:शुल्क। दरकते सामाजिक ताने-बाने को बांधे रखने की ऐसी बेमिसाल रिवाजों के चलते ही आज…

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समस्तीपुर के प्रख्यात बेरोजगार युवाओं को दे रहे रोजगार, भारत सरकार ने स्टार्टअप इंडिया के तरफ से दी मान्यता

समस्तीपुर:- आदमीवाला डाॅट काॅम के स्टार्टअप को भारत सरकार ने स्टार्टअप इंडिया के तरफ से मान्यता दे दी है। इसे पहले से बिहार सरकार के द्वारा भी मान्यता प्राप्त था। आपको बता दें कि आदमीवाला डाॅट काॅम की स्थापना सन् 2015 में समस्तीपुर के मोहिउद्दीननगर निवासी प्रख्यात कश्यप ने किया था। उनका प्रयास है कि हर गांव के हर युवाओं को रोजगार मिले। समस्तीपुर टाउन फेसबुक पेज से बातचीत में प्रख्यात ने बताया कि वह गाँव में बेरोजगार युवाओं की तलाश करते है और उनको उनके काबिलियत के हिसाब से रोजगार देने का प्रयास…

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मैं वो बिहार हूँ… – (समस्तीपुर के लाल कुंदन कुमार राय की कलम से निकली कविता)

गौरवशाली अतीत…उज्जवल भविष्य…कीर्तिमान मैं वर्तमान हुँ… जनक नन्दनी सीताजी की भूमि… बुद्ध, महावीर,गुरु गोविद सिंह का तथ्यज्ञान हुँ… करता है सम्पुर्ण विश्व अभिमान, मैं वो बिहार हुँ… मैं हुँ ऋषि मुनियों की धरती…बयार ज्ञान की जहाँ बहती… बौद्ध जैन धर्मो की बगिया…गुरुवाणी की शाश्वत नदियाँ… गंगा,कोशी,गंडक की कल कल धारा, फल्गु में अमृत का निशान हुँ… करता है सम्पुर्ण विश्व अभिमान, मैं वो बिहार हुँ… कभी मैं हुँ आचार्य चाणक्य,आर्यभट सा ज्ञानी तो कभी अशोक, अजातशत्रु, बिम्बिसार सा महान हुँ… बौद्ध विहारों में बसता…नालंदा विश्वविद्यालय से विश्व पटल पर इतिहास रचता… साहित्य…

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नीतीश जी कय तेहन चमत्कार भ गेलै, स्वर्ग सँ सुन्दर बिहार भ गेलै

(कविता) :- नीतीश जी कय तेहन चमत्कार भ गेलै, स्वर्ग सँ सुन्दर बिहार भ गेलै, दारू शराब राज्य सँ फरार भ गेलै, स्वर्ग सँ सुन्दर बिहार भ गेलै, बीक गेल जमीन जेवर लोटा थारी छिपली, पिया खातिर कानै छलै तेल सिन्दूर टिकुली, सार्थक आब सोलहो श्रृंगार भ गेलै, स्वर्ग सँ सुन्दर बिहार भ गेलै, गिरल छलै सड़क पर नाली मे मुँह बैने, ताहि मुँह पर कुत्ता अप्पन टाँग उठैने, आब ओकर सुन्दर संस्कार भ गेलै, स्वर्ग सँ सुन्दर बिहार भ गेलै, खेलै छलै बाल बच्चा डोलपत्ता गुल्ली, खद् धा डोबहा…

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तुम करो आंतकी हमला, हम करेंगे कड़ी निंदा और निंदास्त्र का प्रयोग – (आनंद की कलम से)

सावन का पहला सोमवार, देश के शिवालयों में शिवभक्तों की भीड़,और इसी बीच बाबा अमरनाथ के दर्शन करने गए श्रद्धालुओं पर आतंकी हमला, 7 लोगों की मृत्यु हो गई, बस ड्राईवर सलीम को सलाम जिसने गोलियों की बौछार के बीच बस को रोका नहीं, मरने वालों की कोई जाति नहीं, गोली जब निकली तो यह पूछ कर नही लगी की राजपूत कौन है, OBC कौन है, दलित कौन है, मरने वाले वो लोग थे, जिन्हें ये नहीं मतलब की कश्मीर में क्या चल रहा है, देश और कश्मीर में की…

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143 साल पहले आज के ही दिन पहली ट्रेन समस्तीपुर से दरभंगा पहुंची थी

आज से 143 साल पहले आज ही के दिन समस्तीपुर-दरभंगा रेलवे के इतिहास की शुरुआत हुई थी। समस्तीपुर और दरभंगा के इतिहास में 17 अप्रैल की तारीख काफी महत्वपूर्ण है। यही वह तारीख है जब वर्ष 1874 में तिरहुत रेलवे की पहली ट्रेन समस्तीपुर से दरभंगा पहुंची थी। दरभंगा की नई पीढ़ी आज शहर में दो रेलवे स्टेशन देखते हैं, एक दरभंगा जंक्शन और दूसरा लहेरियासराय स्टेशन। लेकिन नई पीढ़ी को शायद यह पता भी नहीं होगा कि अतीत में दरभंगा शहर में तीसरा रेलवे स्टेशन भी हुआ करता था…

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आजाद भारत का एकलौता रेलवे स्टेशन जो हमेशा प्राइवेट ही रहा

17 अप्रैल 1874 को समस्तीपुर से तिरहुत रेलवे की पहली ट्रेन दरभंगा पहुंची थी। वैसे तिरहुत रेलवे का सफर सोनपुर से शुरू हुआ था, लेकिन तिरहुत की राजधानी तक का सफर 1974 में ही पूरा कर लिया गया था। भारत के रेल इतिहास में तिरहुत रेलवे दो कारणों से उल्लेखित किया गया है। पहला 1874 से 1934 के बीच भारत में सबसे ज्यादा रेल पटरी तिरहुत रेलवे ने ही बिछाई। दूसरा यात्री सुविधा को लेकर तिरहुत रेलवे ने कई प्रयोग किये, जिनमें सामान्य श्रेणी के डिब्बों में शौचालय की व्यवस्था…

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जाने समस्तीपुर जिले के बारे में रोचक बातें

आज पढे समस्तीपुर के बारे मे समस्तीपुर भारत गणराज्य के बिहार प्रान्त में दरभंगा प्रमंडल स्थित एक शहर एवं जिला है। समस्तीपुर के उत्तर में दरभंगा, दक्षिण में गंगा नदी और पटना जिला, पश्चिम में मुजफ्फरपुर एवं वैशाली, तथा पूर्व में बेगूसराय एवं खगड़िया जिले है। यहाँ शिक्षा का माध्यम हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी है लेकिन बोल-चाल में बज्जिका और मैथिली बोली जाती है। मिथिला क्षेत्र के परिधि पर स्थित यह जिला उपजाऊ कृषि प्रदेश है। समस्तीपुर पूर्व मध्य रेलवे का मंडल भी है। समस्तीपुर को मिथिला का प्रवेशद्वार भी…

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