वट सावित्री पूजा कल, पति के दीघार्यु के लिए महिलाएं पूरे चौबीस घंटे निराहार व्रत रखेंगी

अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिन महिलाएं सोमवार को वट सावित्री पूजा करेंगी। वहीं चतुर्दशी का व्रत रविवार को रखेंगी। पति के दीघार्यु की कामना के साथ महिलाएं पूरे चौबीस घंटे निराहार या फलाहार व्रत रखेंगी। इस पूजा में वट वृक्ष की प्रमुखता है।। व्रत आज, कल पूजा : ज्योतिषाचार्य डॉ। राजनाथ झा के मुताबिक रविवार को महिलाएं चतुर्दशी का व्रत रखेंगी जबकि पूजन सोमवार को होगा। इस बार वट सावित्री पर सोमवती अमावस्या और शनि जयंती का भी खास संयोग बना है। साथ ही सुकर्मा योग भी सोमवार को है।…

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Akshaya Tritiya 2019: 16 साल बाद बन रहा अद्भुत संयोग, होगा काफी फायदेमंद

सोने के प्रति भारतीयों का अनुराग किसी से छिपा नहीं है। इस कीमती धातु को खरीदने के लिए साल भर जिस पवित्र मौके की हम सब बाट जोहते हैं, वह आ चुका है। इस खास तिथि पर रिकॉर्ड बिक्री के लिए कई स्कीमों के साथ सोना कारोबारी भी तैयार हैं। सात मई को अक्षय तृतीया है। सनातन धर्म में वैशाख शुक्ल तृतीया का मान अक्षय तृतीया के रूप में है। तृतीया तिथि छह-सात मई की भोर 3.22 बजे लग रही है जो सात -आठ मई की भोर 2.20 बजे तक…

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भक्तों के अश्रुधार के बीच हुई माता की भव्य विदाई

समस्तीपुर/खानपुर [श्याम मिश्रा] :- शक्ति की अधिष्ठात्री माता दुर्गा की विदाई सोमवार को भव्य तरीके से की गई। माता के विसर्जन यात्रा वैष्णवी दुर्गा मंदिर रामनगर रंजीतपुर पूजा समिति खानपुर की तरफ से विसर्जन यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु बैंड बाजों के बीच नाचते गाते बूढी गंडक नदी तट पर पहुंचे। इस बीच माता के दर्शन के लिए सड़क के किनारे श्रद्धालुओं के हाथ जुड़े थे। माता के दर्शन के लिए सबसे अधिक महिलाओं की भीड़ देखी गई। माता के विदाई के दौरान श्रद्धालुओं के अपनी आँखों के आंसू नहीं रोक…

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खरमास समाप्त, क्लिक कर जानें आने वाले महीनों में विवाह और मांगलिक कार्यों के लिए शुभ दिन

खरमास के चलते पिछले एक माह से विवाह व अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लगा था। रविवार को खरमास समाप्त होने के बाद अब पुनः सोमवार 15 अप्रैल से विवाह व अन्य सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जायेंगे। ज्योतिषी आनन्द दुबे ने बताया कि 15 मार्च से सूर्य के मीन राशि में जाने से खरमास शुरू हो गया था। जो रविवार को सूर्य के मेष राशि में आने के बाद खरमास समाप्त हो गया और अच्छे दिन की शुरुआत हो गई है। विवाह मुहूर्त  अप्रैल – 15,16,17,18,19,20,21,22,23,24,26 मई – 1,2,6,7,8,12,14,15,17,18,19,20,21,23,24,28,29,30…

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अद्भुत अविस्मरणीय रोमांच सौं भरल “भक्त आ भगवती ज्वालामुखी” (मैथिली में पढ़े)

अद्भुत अविस्मरणीय रोमांच सौं भरल दरभंगा जिलाक घनश्यामपुर थाना में बसल मिथिलाक कसरौर बसौली गामक यात्रा।ओहिठामक एक एक दृश्य स्मृति पटल पर बारंबार आवि रहल।सैकडों दुपहिया चारिपहिया वाहन हजारो श्रध्दालुक भीड देखि मन विह्वल भय जिज्ञासु भेल।जेना लागल संपूर्ण मिथिला ऊमैर परल। आदिकाल सौं शक्तिक उपासक मिथिला में मुख्यतः काली ज्वालामुखी आ धर्मराजक अराधना होई छनि।ज्वालामुखी देवीक भूतकालक महिमा सौं परिचित अछि अपन मिथिला। वर्तमान समय में चलि रहल हुनक महिमाक बखान मनुष कि देवतोक वश में नहिं।माँ जगदम्बा के प्रणाम कय टुटल फुटल भाषा में आँखि देखल लिखी रहल…

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शहर के बीचोंबीच टुनटुनिया गुमटी स्थित काली पीठ की दूर-दूर तक फैली है महिमा, नवरात्र में उमड़ती भीड़, क्लिक कर जानें…

समस्तीपुर:- शहर के टुनटुनिया गुमटी स्थित काली शक्ति पीठ की महिमा दूर-दूर तक है। कहते हैं कि यहां माता का दर्शन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यहां नवरात्र में विशेष पूजा होती है। अभी तक यहां ऐसे कई दृष्टांत हुए, जिससे मां के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती चली गई। यहां आने वाले लोग कभी खाली हाथ नहीं लौटते। मां के दर्शन से सारे संताप दूर हो जाते हैं। वैसे प्रत्येक दिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है लेकिन नवरात्र में अधिक भीड़ जुटती है। इसके अलावा महाशिवरात्रि, रामनवमी,…

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समस्तीपुर: मन्नीपुर वाली मां भगवती के दर से नहीं लौटता कोई खाली हाथ

समस्तीपुर:- जिला मुख्यालय से तीन किलोमीटर दूर वारिसरनगर प्रखंड के मन्नीपुर में स्थित है। इस स्थान की महिमा अपरंपार है। इस स्थान की ख्याति दूर-दूर है। कहते हैं यहां आने वालों की हर मुरादें पूरी होती है। कोई भी यहां से खाली हाथ नहीं लौटता है। वैसे तो प्रत्येक दिन यहां सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन नवरात्र में विशेष भीड़ जुटती है। खासकर सप्तमी, अष्ठमी और नवमी को। बड़ी संख्या में महिलाएं मांग खोईंछा भरने पहुंचती हैं। सौ वर्ष पूर्व हुई थी स्थापना आज से तकरीबन सौ वर्ष पूर्व यहां…

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खानपुर: मनोकामना सिद्ध के लिये विख्यात है माता, क्लिक कर पढ़ें स्पेशल रिपोर्ट…

समस्तीपुर/खानपुर [श्याम मिश्रा] :- दिल में आस्था और श्रद्धा होनी चाहिए मां वैष्णवी सभी के मनोकामनाएं को पूर्ण करती है। सभी की मनोकामना पूर्ण होने जैसी बात यहां चरितार्थ होती हैं। हम बात करते हैं प्रखंड के रेबरा, रामनगर, रंजीतपुर के अवस्थित माँ वैष्णवी चैती दुर्गा भगवती की। बताया जाता है कि वर्ष 2013 मुखिया स्वर्गीय दिलीप कुमार महतो के नेतृत्व में ग्रामीणों के सहयोग से माता की पूजा प्रतिमा स्थापित कर शुरू की गई। यहां पूजा की परंपरा मिथिला पद्धति पर आधारित है। इस मंदिर में निर्माण कार्य व…

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नौ अप्रैल से शुरू होगा आस्था का महापर्व चैती छठ

लोकआस्था, सामाजिक समरसता, साधना, आरधना और सूर्योपासना का महापर्व चैती छठ इस बार नौ अप्रैल मंगलवार को नहाय-खाय के साथ शुरू होगा. इसको लेकर व्रतियों के घरों में अभी से भक्ति का माहौल बनने लगा है. बेहद खास और अहम पर्व छठ कई मायने में खास होता है. गर्मी और सूर्य की तपिश के बावजूद व्रती दो दिनों तक उपवास रहकर भक्ति में लीन रहते हैं. चार दिनों तक चलने वाला यह महापर्व नौ अप्रैल को नहाय-खाय से शुरू होगा. 10 को व्रती दिन भर निराहार रहने के बाद शाम…

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यहां हिन्दू-मुस्लिम साथ मिलकर करते हैं राम मंदिर में आरती, फिर चढ़ाते हैं दरगाह पर चादर

अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर सालों से राजनीति होती आ रही है। लेकिन ऐसे में हमें सद्भावना और एकता की एक मिसाल मध्यप्रदेश के राजगढ़ में देखने को मिलती है। यहां आपको राम मंदिर में हिंदू-मुस्लिम एक साथ आरती करते दिखेंगे, वहीं दरगाह पर चादर चढ़ाते भी नजर आएंगे। यहां पर साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पिछले 39 साल पेश की जा रही है। बाबा बदख्शानी की दरगाह दरअसल, राजगढ़ बस स्टैंड के समीप बाबा बदख्शानी की दरगाह है। दरगाह का 105वां सालान उर्स 10 मार्च से…

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अपने में गंगा-जमुनी तहज़ीब समेटे है पटना जंक्शन का महावीर मंदिर

बिहार की राजधानी पटना का इतिहास और परंपरा सभ्यता की शुरुआत से ही आरम्भ होती है। पटना का नाम समय के साथ परिवर्तित होकर पाटलिग्राम, कुसुमपुर, अजीमाबाद और आधुनिक दौर में पटना नाम से जाना जाता है। लेकिन आज हम पटना जंक्शन के निकट स्थित महावीर मंदिर का बात कर रहे हैं। यह पटना में हिन्दुओं का आस्था का सबसे बडा केंद्र माना जाता है। इस मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु हुमानजी की पूजा-अर्चना करने आते है। महावीर मंदीर उत्तर भारत का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। महावीर मंदिर का…

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बिहार: श्मशान में चिता के ऊपर मंदिर, मां के दर्शन से होती हैं मुरादें पूरी

समस्तीपुर के सीमावर्ती जिला दरभंगा में चिता पर बना है मां काली का धाम श्यामा काली मंदिर। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और सभी मांगलिक कार्य भी किए जाते हैं। इस मंदिर को श्यामा माई के मंदिर के नाम से पर जाना जाता है। श्यामा माई का मंदिर श्मशान घाट में महाराजा रामेश्वर सिंह की चिता पर बनाया गया है और यह अपने आप में असामान्य घटना है। महाराजा रामेश्वर सिंह दरभंगा राज परिवार के साधक राजाओं में थे। राजा के नाम के कारण ही इस मंदिर को…

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भगवान शिव को बहुत प्रिय है बेलपत्र, इसके प्रयोग से टल जाती हैं सारी मुसीबतें

ज्योतिष के जानकारों की मानें तो भगवान शिव के पूजन में बेलपत्र का विशेष महत्व है. शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से प्रसन्न होते हैं महादेव. मान्यता है कि शिव की उपासना बिना बेलपत्र के पूरी नहीं होती. अगर आप भी देवों के देव महादेव की विशेष कृपा पाना चाहते हैं तो बेलपत्र के महत्व को समझना बेहद ज़रूरी है. आइए जानते हैं कि बेलपत्र क्यों है शिव को इतना प्रिय और क्या है बेलपत्र का महत्व… बेलपत्र का महत्व बेल के पेड़ की पत्तियों को बेलपत्र कहते हैं. बेलपत्र…

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समस्तीपुर: सजधज कर पंडाल तैयार, मां शारदे की पूजा आज…

समस्तीपुर:- सरस्वती पूजा को लेकर जिले भर में तैयारी की जा रही है। पूजा की तैयारी अंतिम चरण में है। जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के अलावे कई मोहल्लों व गांव के चौक-चौराहों पर भी मां शारदे की आराधना की जायेगी। इसको लेकर पंडाल को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रुक-रुक कर हो रही बारिस के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है। इसको लेकर शनिवार की सुबह से ही मां शारदे की प्रतिमाओं को ले जाने की प्रक्रिया शुरू हो गयी। हरसिंगपुर के पंडित अमित कुमार झा ने…

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पढाई, कला और संगीत के क्षेत्र में सफलता दिलाएंगे माँ सरस्वती के ये 11 नाम….

हम सभी जानते है कि अच्छे करियर से जीवन खिल जाता है. यह करियर पढाई, कला, संगीत आदि किसी भी क्षेत्र में आप बना सकते है. इसके लिए दो चीजे बहुत जरुरी है. एक तो आपकी लगन और दूसरी आपकी किस्मत. यदि हम लगन और मेहनत तो बहुत अच्छी करे और साथ ही कला की देवी माँ सरस्वती की कृपा भी हमें प्राप्त हो तो हमें बुलंदियों तक जाने तक कोई रोक नही सकता. हम अपने सभी सपने पुरे कर सकते है और यश कीर्ति के साथ धनवान भी बन…

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सरस्‍वती के साथ कामदेव का भी होता है इस दिन पूजन ये है विधि

ज्ञान ही नहीं प्रेम आर श्रद्घा का भी पर्व बसंत पंचमी सिर्फ ज्ञान और विद्या के सम्मान का ही पर्व नहीं है, बल्कि इस दिन प्रेम और आस्था भी साथ साथ पूजे जाते हैं। इसीलिए ये एक सम्पूर्ण उत्सव माना जाता है। इसलिए जहां विद्याअर्जन के लिए इच्छुक बालक ज्ञान की देवी सरस्वती की अर्चना करते हैं वहीं प्रेम के देवता कामदेव को भी पूजा जाता है। इसके अलावा इस दिन भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती है। कामदेव की भी पूजा बसन्त कामदेव का सहचर है। अतः इस…

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कुंभ 2019; नागा संन्यासी यूं लैपटॉप पर रहते हैं ऑनलाइन, पेमेंट भी कर रहे कैशलेस

कुंभ 2019 (Kumbh Mela 2019) के आगाज में अब एक दिन शेष है। देश के अलग-अलग कोने से हाईटेक संतों का जमावड़ा लगने लगा है। इनमें से कोई फेसबुक पर लाइव प्रवचन दे रहा है तो कोई लैपटॉप से संगम क्षेत्र के फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहा है। कई संत तो फोन पर बात करने के लिए ब्लू टूथ इस्तेमाल कर रहे हैं। आइए जानते हैं कुंभ में पहुंचे ऐसे ही कुछ साधु-संत के बारे में…. नागा संन्यासी लैपटॉप पर रहते हैं ऑनलाइन, करते हैं कैशलेस पेमेंट :…

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मकर संक्रांति: तिल के यह 6 प्रयोग देंगे मनचाही खुशियां, जानिए सूर्य के इस विशेष पर्व का महत्व

भारतीय सूर्य-संस्कृति में दैनिक सूर्य पूजा का प्रचलन रामायण काल से चला आ रहा है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा नित्य सूर्य पूजा का उल्लेख रामकथा में मिलता है। सूर्यवंशी श्री राम के पूर्व मार्तण्ड थे। राजा भगीरथ सूर्यवंशी थे, जिन्होंने भगीरथ तप-साधना के परिणामस्वरूप पापनाशिनी गंगा को पृथ्वी पर लाकर अपने पूर्वजों को मोक्ष प्रदान करवाया था। कपिल मुनि के आश्रम पर जिस दिन मातु गंगे का पदार्पण हुआ था, मकर संक्रांति का दिन था। पावन गंगाजल के स्पर्शमात्र से राजा भगीरथ के पूर्वजों को स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी। राजा…

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दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शक्तिपीठ हैं ये चमत्कारी मंदिर, जहां विराजमान हैं बिना सिर वाली देवी

देवी मां के शक्तिपीठों में से दूसरा सबसे बड़ा शक्तिपीठ झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित है। यह शक्तिपीठ छिन्नमस्तिका मंदिर से प्रसिद्ध है। मां छिन्नमस्तिके मंदिर रजरप्पा के भैरवी-भेड़ा और दामोदर नदी के संगम पर स्थित लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां ना केवल राज्य, देश बल्कि विश्वभर से भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं। श्रीयंत्र का स्वरूप छिन्नमस्तिका दस महाविद्याओं में छठा रूप मानी जाती है। यह मंदिर दामोदर-भैरवी संगम के किनारे त्रिकोण मंडल के योनि यंत्र पर स्थापित है,…

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जिस लंगर का खाना हम बड़े चाव से खाते हैं, उसकी शुरुआत कब और कहां से हुई

सिख धर्म के उपासनागृह यानी गुरूद्वारे में जब भी जाते हैं तो श्रद्धा का स्वाद लंगर भी चखते हैं। अंजाने चेहरों के बीच गुरूद्वारे में मिलने वाली दाल का स्वाद कुछ ऐसा होता ही कि बड़े-बड़े फाइव स्टार होटल भी इसके स्वाद के आगे फ़ेल हो जाए। गुरूद्वारे में सिर झुकाने के बाद दीवारों पर लगी इनफार्मेशन स्लेट तो आप सब ने पढ़ी होगी, पर क्या कभी आपको ये जानकारी मिली कि लंगरों का चलन कैसे शुरू हुआ? आज हम आपको इसी लंगर के बारे में बताने जा रहे हैं।…

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