यहां हिन्दू-मुस्लिम साथ मिलकर करते हैं राम मंदिर में आरती, फिर चढ़ाते हैं दरगाह पर चादर

अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर सालों से राजनीति होती आ रही है। लेकिन ऐसे में हमें सद्भावना और एकता की एक मिसाल मध्यप्रदेश के राजगढ़ में देखने को मिलती है। यहां आपको राम मंदिर में हिंदू-मुस्लिम एक साथ आरती करते दिखेंगे, वहीं दरगाह पर चादर चढ़ाते भी नजर आएंगे। यहां पर साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पिछले 39 साल पेश की जा रही है। बाबा बदख्शानी की दरगाह दरअसल, राजगढ़ बस स्टैंड के समीप बाबा बदख्शानी की दरगाह है। दरगाह का 105वां सालान उर्स 10 मार्च से…

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अपने में गंगा-जमुनी तहज़ीब समेटे है पटना जंक्शन का महावीर मंदिर

बिहार की राजधानी पटना का इतिहास और परंपरा सभ्यता की शुरुआत से ही आरम्भ होती है। पटना का नाम समय के साथ परिवर्तित होकर पाटलिग्राम, कुसुमपुर, अजीमाबाद और आधुनिक दौर में पटना नाम से जाना जाता है। लेकिन आज हम पटना जंक्शन के निकट स्थित महावीर मंदिर का बात कर रहे हैं। यह पटना में हिन्दुओं का आस्था का सबसे बडा केंद्र माना जाता है। इस मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु हुमानजी की पूजा-अर्चना करने आते है। महावीर मंदीर उत्तर भारत का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। महावीर मंदिर का…

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बिहार: श्मशान में चिता के ऊपर मंदिर, मां के दर्शन से होती हैं मुरादें पूरी

समस्तीपुर के सीमावर्ती जिला दरभंगा में चिता पर बना है मां काली का धाम श्यामा काली मंदिर। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और सभी मांगलिक कार्य भी किए जाते हैं। इस मंदिर को श्यामा माई के मंदिर के नाम से पर जाना जाता है। श्यामा माई का मंदिर श्मशान घाट में महाराजा रामेश्वर सिंह की चिता पर बनाया गया है और यह अपने आप में असामान्य घटना है। महाराजा रामेश्वर सिंह दरभंगा राज परिवार के साधक राजाओं में थे। राजा के नाम के कारण ही इस मंदिर को…

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भगवान शिव को बहुत प्रिय है बेलपत्र, इसके प्रयोग से टल जाती हैं सारी मुसीबतें

ज्योतिष के जानकारों की मानें तो भगवान शिव के पूजन में बेलपत्र का विशेष महत्व है. शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से प्रसन्न होते हैं महादेव. मान्यता है कि शिव की उपासना बिना बेलपत्र के पूरी नहीं होती. अगर आप भी देवों के देव महादेव की विशेष कृपा पाना चाहते हैं तो बेलपत्र के महत्व को समझना बेहद ज़रूरी है. आइए जानते हैं कि बेलपत्र क्यों है शिव को इतना प्रिय और क्या है बेलपत्र का महत्व… बेलपत्र का महत्व बेल के पेड़ की पत्तियों को बेलपत्र कहते हैं. बेलपत्र…

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समस्तीपुर: सजधज कर पंडाल तैयार, मां शारदे की पूजा आज…

समस्तीपुर:- सरस्वती पूजा को लेकर जिले भर में तैयारी की जा रही है। पूजा की तैयारी अंतिम चरण में है। जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के अलावे कई मोहल्लों व गांव के चौक-चौराहों पर भी मां शारदे की आराधना की जायेगी। इसको लेकर पंडाल को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रुक-रुक कर हो रही बारिस के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है। इसको लेकर शनिवार की सुबह से ही मां शारदे की प्रतिमाओं को ले जाने की प्रक्रिया शुरू हो गयी। हरसिंगपुर के पंडित अमित कुमार झा ने…

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पढाई, कला और संगीत के क्षेत्र में सफलता दिलाएंगे माँ सरस्वती के ये 11 नाम….

हम सभी जानते है कि अच्छे करियर से जीवन खिल जाता है. यह करियर पढाई, कला, संगीत आदि किसी भी क्षेत्र में आप बना सकते है. इसके लिए दो चीजे बहुत जरुरी है. एक तो आपकी लगन और दूसरी आपकी किस्मत. यदि हम लगन और मेहनत तो बहुत अच्छी करे और साथ ही कला की देवी माँ सरस्वती की कृपा भी हमें प्राप्त हो तो हमें बुलंदियों तक जाने तक कोई रोक नही सकता. हम अपने सभी सपने पुरे कर सकते है और यश कीर्ति के साथ धनवान भी बन…

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सरस्‍वती के साथ कामदेव का भी होता है इस दिन पूजन ये है विधि

ज्ञान ही नहीं प्रेम आर श्रद्घा का भी पर्व बसंत पंचमी सिर्फ ज्ञान और विद्या के सम्मान का ही पर्व नहीं है, बल्कि इस दिन प्रेम और आस्था भी साथ साथ पूजे जाते हैं। इसीलिए ये एक सम्पूर्ण उत्सव माना जाता है। इसलिए जहां विद्याअर्जन के लिए इच्छुक बालक ज्ञान की देवी सरस्वती की अर्चना करते हैं वहीं प्रेम के देवता कामदेव को भी पूजा जाता है। इसके अलावा इस दिन भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती है। कामदेव की भी पूजा बसन्त कामदेव का सहचर है। अतः इस…

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कुंभ 2019; नागा संन्यासी यूं लैपटॉप पर रहते हैं ऑनलाइन, पेमेंट भी कर रहे कैशलेस

कुंभ 2019 (Kumbh Mela 2019) के आगाज में अब एक दिन शेष है। देश के अलग-अलग कोने से हाईटेक संतों का जमावड़ा लगने लगा है। इनमें से कोई फेसबुक पर लाइव प्रवचन दे रहा है तो कोई लैपटॉप से संगम क्षेत्र के फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहा है। कई संत तो फोन पर बात करने के लिए ब्लू टूथ इस्तेमाल कर रहे हैं। आइए जानते हैं कुंभ में पहुंचे ऐसे ही कुछ साधु-संत के बारे में…. नागा संन्यासी लैपटॉप पर रहते हैं ऑनलाइन, करते हैं कैशलेस पेमेंट :…

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मकर संक्रांति: तिल के यह 6 प्रयोग देंगे मनचाही खुशियां, जानिए सूर्य के इस विशेष पर्व का महत्व

भारतीय सूर्य-संस्कृति में दैनिक सूर्य पूजा का प्रचलन रामायण काल से चला आ रहा है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा नित्य सूर्य पूजा का उल्लेख रामकथा में मिलता है। सूर्यवंशी श्री राम के पूर्व मार्तण्ड थे। राजा भगीरथ सूर्यवंशी थे, जिन्होंने भगीरथ तप-साधना के परिणामस्वरूप पापनाशिनी गंगा को पृथ्वी पर लाकर अपने पूर्वजों को मोक्ष प्रदान करवाया था। कपिल मुनि के आश्रम पर जिस दिन मातु गंगे का पदार्पण हुआ था, मकर संक्रांति का दिन था। पावन गंगाजल के स्पर्शमात्र से राजा भगीरथ के पूर्वजों को स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी। राजा…

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दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शक्तिपीठ हैं ये चमत्कारी मंदिर, जहां विराजमान हैं बिना सिर वाली देवी

देवी मां के शक्तिपीठों में से दूसरा सबसे बड़ा शक्तिपीठ झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित है। यह शक्तिपीठ छिन्नमस्तिका मंदिर से प्रसिद्ध है। मां छिन्नमस्तिके मंदिर रजरप्पा के भैरवी-भेड़ा और दामोदर नदी के संगम पर स्थित लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां ना केवल राज्य, देश बल्कि विश्वभर से भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं। श्रीयंत्र का स्वरूप छिन्नमस्तिका दस महाविद्याओं में छठा रूप मानी जाती है। यह मंदिर दामोदर-भैरवी संगम के किनारे त्रिकोण मंडल के योनि यंत्र पर स्थापित है,…

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जिस लंगर का खाना हम बड़े चाव से खाते हैं, उसकी शुरुआत कब और कहां से हुई

सिख धर्म के उपासनागृह यानी गुरूद्वारे में जब भी जाते हैं तो श्रद्धा का स्वाद लंगर भी चखते हैं। अंजाने चेहरों के बीच गुरूद्वारे में मिलने वाली दाल का स्वाद कुछ ऐसा होता ही कि बड़े-बड़े फाइव स्टार होटल भी इसके स्वाद के आगे फ़ेल हो जाए। गुरूद्वारे में सिर झुकाने के बाद दीवारों पर लगी इनफार्मेशन स्लेट तो आप सब ने पढ़ी होगी, पर क्या कभी आपको ये जानकारी मिली कि लंगरों का चलन कैसे शुरू हुआ? आज हम आपको इसी लंगर के बारे में बताने जा रहे हैं।…

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क्‍या आप जानते हैं शनिदेव को क्‍यों चढ़ाया जाता है तेल?

शनिवार के दिन सुबह से ही तेल दान मांगने वाले और शनि पर तेल का अभिषेक करने वाले लोग मिल जाएंगे. शनिदेव पर तेल क्‍यों चढ़ाया जाता है जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा… कर्मों का फल देते हैं शनिदेव कर्मों का फल देते हैं शनिदेव ग्रहों में शनिदेव को कर्मों का फल देना वाला ग्रह माना गया है. शनिदेव एकमात्र ऐसे देव हैं जिनकी पूजा लोग डर की वजह से करते हैं. लेकिन ऐसा नहीं है शनि देव न्‍याय के देवता हैं जो इंसान को उसके कर्म के हिसाब…

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“किन्तु ये जीवन इतना भी आसान नही है… हौसले तो है बुलंद पर उड़ने को असमान नही”

समस्तीपुर:- हाथों मे माँ सरस्वती का वास, बातों में अपनेपन का ऐहसास…. जीवंत करते है मिट्टी से बोलती प्रतिमाएँ कई पीढियों से श्री रामदयाल पण्डित जी, श्री चन्देश्वर पण्डित जी और दिनेश पण्डित जी अपने परिवार समेत…अदभुत, अप्रतिम, अकल्पनीय ये प्रतिमाएँ ही इन्हे बनाती है है सब से खास… कहते है सृष्टी रचना ब्रह्मा जी ने किया और एक से बढकर एक ऐसी रचनाएं उत्पन्न की जिन्हे देखने के लिये स्वयं देवता भी धरती पर आते रहे और मुग्ध होते रहे है… रचनाओं का कुछ ऐसा ही संसार है, जहाँ…

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धूमधाम से हो रही भगवान विश्‍वकर्मा की पूजा, जानिए पूजा मुहूर्त व और भी बहुत कुछ

समस्तीपुर:- संपूर्ण सृष्टि में जो भी कर्म सृजनात्मक हैं, जिन कर्मो से जीवन संचालित होता है, उन सभी के मूल में भगवान विश्वकर्मा को माना जाता है। शिल्प के भगवान विश्वकर्मा की पूजा आज पूरे भारत में धूम-धाम से की जा रही है। सोमवार को जयेष्ठा नक्षत्र और आयुष्मान योग में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जा रही है। कर्मकांड विशेषज्ञ पंडित राकेश झा शास्त्री ने पंचांगों के हवाले से कहा कि भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष में ज्येष्ठा नक्षत्र में पूजा हो रही है। भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से भगवान…

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मन्नीपुर भगवती स्थान जहां पूरी होती हैं हर भक्तों की मुरादें

समस्तीपुर:- मनीपुर भगवती स्थान, जिला मुख्यालय से तीन किलोमीटर दूर वारिसरनगर प्रखंड के मन्नीपुर में स्थित है। इस स्थान की महिमा अपरंपार है। इस स्थान की ख्याति दूर-दूर तक है। कहते हैं यहां आने वालों की हर मुरादें पूरी होती है। कोई भी यहां से खाली हाथ नहीं जाता है। वैसे तो प्रत्येक दिन यहां सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन नवरात्र में विशेष भीड़ जुटती है। खासकर सप्तमी, अष्ठमी व नवमी को। बड़ी संख्या में महिलाएं मांग खोईंछा भरने पहुंचती हैं। इतिहास: सौ वर्ष पूर्व हुई थी स्थापना: आज से…

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पुत्रों की लंबी आयु के लिए माताएं रखती हैं जिउतिया व्रत

समस्तीपुर : हिन्दू धर्म में कई व्रत एवं पूजा है जो महिलाएं रखती है। इसी में एक है जिउतिया का व्रत। पुत्रों की लंबी आयु और उज्जवल भविष्य के लिए मां जिउतिया के व्रत रखती है। इस बार जिउतिया का शुभ मुहूर्त 13 सितंबर बुधवार को रोहणी नक्षत्र 9.36 बजे तक रहेगा। इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र आरंभ हो जाएगा। इसी नक्षत्र में पूजा करना श्रेष्ठकारी होगा। आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को सिद्धि योग में माताएं संतान की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान…

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सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक मोरवा का खुदनेश्वर धाम

समस्तीपुर:- जिला से करीब 17 किमी दक्षिण-पश्चिम में मोरवा प्रखंड मुख्यालय से लगभग 500 मीटर की दूरी पर अवस्थित हैं खुदनेश्वर धाम। यह सामाजिक सौहार्द एवं साम्प्रदायिक एकता का अनुपम स्थल है। यहां बाबा खुदनेश्वर के शिवलिंग एवं खुदनी बीबी के मजार की पूजा अर्चना श्रद्धा एवं विश्वास के साथ की जाती है। यह स्थल अपने आप में अद्वितीय है। प्राचीन किंवदन्ती है कि सात सौ वर्ष पूर्व यहां घनघोर जंगल था जहां आस पास के लोग मवेशी चराया करते थे। वहीं मुस्लिम बाला खुदनी बीबी अक्सर गाय चराया करती…

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इस बार सावन में बन रहे हैं विशेष संयोग, पड़ेंगे पांच सोमवार

समस्तीपुर:- 10 जुलाई से शुरू होने जा रहा भगवान शिव का प्रिय माह सावन इस बार बेहद खास होगा। वजह है इस बार विशेष योग का बनना। दरअसल इस बार सावन माह में पांच सोमवार हैं। ये पवित्र माह सोमवार से ही शुरू होगा और सोमवार को ही इसका समापन (7 अगस्त) भी होगा। ये खास योग कई वर्षों के बाद ही बनता है। इस बार सावन माह में तीन सोमवार सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। पहला सोमवार सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू होगा और आखिरी सोमवार के सर्वार्थ…

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पिया की लंबी उम्र का व्रत आज

समस्तीपुर। वट सावित्री व्रत का पूजन 25 मई को होगा। सुहागिनें सोलह श्रृंगार करके बरगद के पेड़ के नीेचे पूजा अर्चना करनें पहुंचेंगी। वे अपने पिया की लंबी उम्र की कामना करेंगी। ऐसी मान्यता है कि आज ही के दिन मां सावित्री ने यमराज के फंदे से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी। व्रत को लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं पूजन सामग्री खरीदने के लिए बाजार पहुंची। जगह-जगह सड़कों पर पूजन सामग्री की दुकानें सजी थी। आम लीची तथा अन्य तरह की फलों की दुकानों पर भी…

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कथा महायज्ञ के लिए निकली भव्य कलशयात्रा

समस्तीपुर। जिले के ऐतिहासिक श्रीशिव मंदिर खुदनेश्वर धाम मोरवा में गुरुवार को 10 दिवसीय श्रीराम कथा व शिवपुराण कथा महायज्ञ का भव्य कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। कलश यात्रा में 108 कुंआरी कन्याओं ने भाग लिया। कलश यात्रा में शामिल कन्याएं माथे पर कलश लेकर खुदनेश्वर धाम के प्रांगण अवस्थित पावन शिवगंगा से पवित्र जल भरकर क्षेत्र में परिक्रमा करते हुए पुन: कथास्थल पहुंची। जयकारे के बीच कलश यात्रा के पहुंचते ही वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश स्थापति किए गए। उल्लेखनीय है कि खुदनेश्वर धाम परिसर में 12 मई…

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