बिहार : बिल बढ़ाने के लिए डॉक्टर ने काटा मरीज का पैर, उपभोक्ता फोरम ने 99 लाख हर्जाना देने को कहा

चंद पैसों के लालच में जख्मी छात्र ओंकारनाथ का पैर काट देने वाले डॉक्टर से 99 लाख 76 हजार रुपए की क्षतिपूर्ति के लिए बिहार के बक्सर जिला उपभोक्ता फाेरम ने डॉक्टर व अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। 21 अप्रैल 2015 को एक सड़क दुर्घटना में उसे घुटने में चोट लगी थी। बेहतर इलाज के लिए बक्सर सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने बनारस रेफर कर दिया। लेकिन, एम्बुलेंस चालक ने उसे बेवकूफ बनाकर बनारस के मैक्सवेल प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। डॉक्टर ने पैसों के लालच में बेवजह उसका पैर काट दिया। एमओआईसी वाराणसी की जांच के बाद डॉक्टर को दोषी भी पाया गया।

इसके बाद बक्सर औद्योगिक थाने में एफआईआर दर्ज हुई। लेकिन, उसपर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिले के डीएवी स्कूल का पूर्व छात्र ओंकार खो-खो का जिला चैंपियन रहा है। बहरहाल वह डीयू के हंसराज कॉलेज से पीजी करने के बाद बायजूस कंपनी में ऑडिटर की नौकरी कर रहा है।

घायल होने के बाद से 35 लाख इलाज पर खर्च हुआ

ओंकारनाथ का बीएचयू वाराणसी से उसका इलाज चल रहा है। करीब 35 लाख रुपए खर्च हो गए हैं। ओंकार की मां मंटू देवी ने बताया कि उनपर 20 लाख रुपए कर्ज हो गए हैं। बीएचयू के डॉक्टरों ने इसी माह बताया कि नकली पांव लगाने के लिए उसका पैर पुनः काटना पड़ेगा। क्योंकि लापरवाही से पैर काटे जाने के कारण कृत्रिम पैर लगाना सम्भव नहीं है। 2013 में जब वह जिला स्तरीय खो-खो का सिरमौर बना था। वर्ष 2014 के हंसराज आर्यन टूर्नामेंट में उसने 1500 मीटर के रेस में भी बाजी मारी थी, लेकिन डॉक्टर व अस्पताल के चंद पैसों के लालच में अपना एथलेटिक कैरियर गंवाना पड़ा।

Avinash Roy

Editor-in-Chief at Samastipur Town Web Portal